Ganesha Chalisa Song Lyrics In Hindi || Anuradha Paudwal ||

 Song : Ganesha Chalisa

Singer : Anuradha Paudwal


Ganesha Chalisa Song Lyrics In Hindi



                         ।। दोहा ।।                            

जय गणेश मंगल करण ।

भरण जनम सुख साज ।।

दीन जानी किजै दया ।

हम पर श्री महाराज ।।

   ।। चौपाई ।।

जय गणपति जय जय शिवनंदन।

जय जय जन जन कलुष निकंदन ।।

जय लंबोदर विघ्न विनाशन ।

जयति सुमुख विज्ञान विकासन ।।

जय जय कपिल जयति एक दंता ।

जपत जाहि नित सब सुर संता ।।

जय जय भाल चंद्र अति पावन ।

जय जग करण सकल मनभावन ।।

जयति विकट जय जयति विनायक ।

जय सुर वंदित भाग्य विधायक ।।

श्री गेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

जय जय धूम्रकेतु असुरारी ।

जय गजमुख त्रैलोक विहारी ।।

द्वादश नाम जपे जो कोई ।

ताहि निरंतर मंगल होई ।।

रिद्धि सिद्धि दोउ चंवर डुलावें ।

महिमा अमित पार वो पावे ।।

लक्ष्य लाभ दोउ तनय सुहाये ।

मुदित होत जग जात है पाये ।।

जय गजबदन सदन सुखदाता ।

विश्व विनायक बुद्धि विधाता ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

एक समय शिव ऋषि तरी धारी ।

पार्वती कहे दीननकारी ।।

किसकिंधा गिरि गिरिजा गई ।

तहं तुमको प्रगटावत भई ।।

द्वारपाल तहां तुम्ही बनाई ।

आप गुफा विच ध्यान लगाई ।।

कछुक दिवस बिते पर शंकर ।

भये शांत भोले अभयंकर ।।

खोजत गिरिजाहि तहां चली आये ।

रक्षक द्वार तुमहि तहं पाये ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

शिव प्रविशन चहं गुफा मझारी ।

जय गज मुख त्रिलोक विहारि ।।

कोपि शंभू तहं युद्ध मचावा ।

धड़ से सर तब काट गिरावा ।।

शिव प्रार्थना सुनी शिव तोसे ।

करी सिर जोड़त महि पुनि पोसे ।।

एक समय गणपति यह हेतु ।

सुलभ सुनाई कहे बस केतु ।।

महि परिक्रमा करिके जो आवे ।

सो गणेश की पद्धवि पावे ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

सुनि मयूर चढ़ि चले कुमारा ।

तब तुम यह नीज मन हि विचारा ।।

मातु पिता परिकर जो लवे ।

यही परिक्रमा फल सो पावे ।।

यह मन सोच परत तोहिं ठाई ।

गई परिक्रमा शिव गिरजाई ।।

बुद्धिमान लखी सब सुर हरषे ।

तुमहि सराही सुमन बहु अरसे ।।

सुर सम्मति हे तबहिं महेशा ।

तुमहि बनाये वेगी गणेशा ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

आदि कल्प में सृष्टि प्रसारन ।

हित इच्छा किन्हेउ जग तारण ।।

मुनि देखहु हरि नयन उघारी ।

सकल जगत मे है अंधियारी ।।

तब हरि धरेउ गणेश स्वरूपा ।

गजमुख लंबोदर सुर भूपा ।।

दीर्घ सूंड सो सब अंधियारी ।

पेंच लपेटहु गर में डारी ।।

तब ते जगत पुज्य प्रभु भयउ ।

आदि गणेश कहावत भयउ ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

महिमा नाथ कहां लगी गाऊँ ।

तब यशवर्णत पार ना पाऊँ ।।

जय जग वंदन विद्या सागर ।

जय मोदक प्रिय सब गुण आगर ।।

कहां लगी कहु बदन की शोभा ।

मुनि मन जाहि विलोकत लोभा ।।

लाल वरण दोउ चरण सुहावन ।

अमित अधिक जो किनेउ पावन ।।

नाग यज्ञ उप बीत सुहावे ।

दीन नयन लखी अरि दुःख पावे ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

अक्षमाल निज तंत दक्ष कर ।

मोदक पात्र परस बायें धर ।।

पद्मासम मुसक असवारी ।

सोहत त्रिविध ताप भये हारी ।।

जय जय देव सुजन मन रंजन ।

जय जय सुरदिज महि दुःख भंजन।।

जय जय सुर गिरिजा के नंदन ।

जय जय जयति भक्त उर चंदन ।।

जय जय अग्र पुज शुभ धामा ।

सुमिरत सिद्ध होई सब कामा ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

जय जय व्यास सहायक स्वमी ।

कृपा करहु उर अंतर्यामी ।।

जय जय जय पितांबरधारी ।

शुक्लांबर धरि जय अगहारी ।।

जयति रत्र अंबर परिधानम् ।

विघ्न विमोचन मोद निधानम् ।।

शेभु जलंधर यद्ध मचावा ।

तहाँ आप निज बल ही दिखावा ।।

अगनित दैत्य निमिस में मारे ।

भागे बचे रहे अधमारे ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

हे प्रभु दीन बंधु अविनाशी ।

करहुँ कृपा त्रैलोक विलासी ।।

जप तप पुजा पाठ अचारा ।

नहीं जानत मति मंद गंवारा ।।

नहीं विज्ञान ग्रंथ मत जानों ।

केवल तब भरोस उर मानों ।।

भूल चूक जो होई हमारो ।

क्षमिय नाथ मैं दास तिहारो ।।

लहि मोह पह बल बुद्धि लवलेसा ।

सब बल निर्भय रहत हमेशा ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

नाथ आप हो बुद्धि विधाता ।

अति आतुर दुःख करहु नी पाता ।।

जो जन तुम्हरो ध्यान लगावें ।

सो अभिमत फल वेग ही पावें ।।

नाथ मोहि बहु दुष्ट सतावे ।

शुभ का मन में विघ्न मचावे ।।

इनकर नाश वेग ही किजै ।

महाराज मम विनय सुनिजे ।।

तुम ही आन गिरिजा शंकर की ।

विपत्ति हटाओ जन के घर की ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

जो यह पढ़े गणेश चालीसा ।

ताकहँ सिद्धि होई सिद्धिसा ।।

जो व्रत चौथ करे मन लाई ।

ता पर गणपति होई सहाई ।।

निर्जल व्रत दिन भर जो करई ।

चंद्रोदये पुजा अनुसरई ।।

यथा शक्ति पुजे धरि ध्याना ।

गणपति छोड़ि भजे नहीं आना ।।

आकर कारज सकल संवारे ।

सत्य सत्य सुती संत पुकारे ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

चौथ परम प्यारी गणराजहि ।

कामह चार मुख्य करि भाजहि ।।

संकट चौथ को पुजि गणेशा ।

पुजिये पाद विनायक ईसा ।।

सिद्धिविनायक चौथ काहावे ।

जासु कृपा जन अभिमत पावे ।।

श्रावण शुक्ल चतुर्थी आवे ।

तब व्रत को आरंभ लगावे ।।

एक बार करी सात्विक स्नाना ।

रहे सनियम तजे सब व्यसना ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

पुजे नित्य कपर दी गणेशा ।

ताके पाप रहे नहीं लेसा ।।

भाद्र शुक्ल की चौथ सुहावन ।

व्रत समाप्त तेहि दिन करी पावन ।।

द्ववादश नाम पाठ नित करई ।

मन वच कर्म ध्यान नित धरई ।। ६८

विद्याआरम्भ विवाह मझाहिं ।

पुनि प्रवेश यात्रा सुखकारी ।।

संकट तथा विकट संग्रामा ।

विघ्न होई नहीं कोनउ कामा ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

सत्य सत्य नहीं संशय भाई ।

गणपति कृपा सुमन अग माई ।।

है अबोध जन रसिक विहारी ।

जागत सोवत शरण तुम्हारी ।।

अक्षर पदयात्रा स्वर भंगा ।

क्षमहुं पाठ के विकरत अंगा ।।

तब प्रसाद पुरन सब होई ।

है मरजाद नाम की सोई ।।

वंदउ नाथ जुगल कर जोरी ।

सुन लिजै प्रभु अरजी मोरी ।।

श्री गणेशाय नमः

श्री लंबोदराय नमः

श्री विघ्नेशाय नमः

श्री एक दंताय नमः

श्री गणेशाय नमः

    ।। दोहा ।।

निश्चय दृढ़ विश्वास करी ।

श्रवण करे मन लाये ।।

ताके ऊपर शंभू सुत ।





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